Japan’s Highest Interest Rate vs India’s Rate Cut | Impact on World Economy & India | Rishi Jain Sir

हेलो बच्चों क्या हाल है? चलिए अगर सोचिए बैंक आपसे यह कहे कि साहब आप मुझसे उधार लीजिए बदले में आपको कोई ब्याज नहीं देना है। केवल आप हमारे मूलधन को चुका दीजिए। आप बोलेंगे यह बैंक नहीं है। साक्षात देवदूत है। अच्छा दूसरा एक लेते हैं कंडीशन कि बैंक आपसे कहता है साहब कि आप अगर हमारे यहां जमा करेंगे। आप यहां हमारे यहां अपने पैसे को जमा करेंगे तो हम आपको कोई ब्याज नहीं देंगे। बल्कि हो सकता है आपसे हम ब्याज लेंगे। आप जमा कर रहे हैं। आपसे ब्याज लेंगे तो आपको लगेगा यह बैंक है कि राक्षस है। लगाना कुछ अलग। कुछ ऐसी ही स्थिति 2016 से 2016 से 2024 तक जापान में रही है। जापान में रही है। और न्यूज़ क्या है जो वास्तव में एक बहुत बड़ा है छोटा। लेकिन वही है ना छोटा पैट बड़ा छोटा पैकेट बड़ा धमाका न्यूज़ यह है कि जापान ने अपने ब्याज दरों को बढ़ाया है। जापान ने ब्याज दर को जो जापान का अभी ब्याज दर 0.5% था25 बढ़ाकर 0.75% कर दिया। न्यूज़ सामान्य है। सामान्य सा न्यूज़ है। लेकिन जरा सोचिए अगर मैं कहूं कि यह ब्याज दर पिछले 30 सालों में जापान में सबसे ज्यादा ब्याज दर रहा। अब हो गया है। पिछले 30 सालों में तीन दशकों में सबसे अधिक ब्याज दर अब हो चुका है। सोचिए तो फिर आप क्या इस न्यूज़ का मतलब समझेंगे? दूसरा अगर मैं कहूं कि जब एक ओर भारत अपने ब्याज दर को कम किया है। अभी देखिए रेपो को 5.5 से घटाकर 5.25 किया गया है रेपो दर को। तो भारत में जहां केंद्रीय बैंक सेंट्रल बैंक अपने ब्याज दर को कम कर रही है। जहां अन्य देश भी अपने ब्याज दर को घटा रहे या स्थिर रखे हुए हैं। वहीं जापान ने अपने ब्याज दर को बढ़ा दिया है। क्या है इस न्यूज़ के मायने? क्या इसका फर्क पड़ेगा जापान में? आखिरकार जापान के केंद्रीय बैंक ने ऐसा क्यों किया है? इसका जापान और विश्व की अर्थव्यवस्था और विशेषकर भारत में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इसको हम विस्तार से समझते हैं। तो आइए इसको समझने से पहले आपको बता दूं कि पीडब्ल्यू ओनली आईएस का एक सृजन प्रीलिम्स बैच चल रहा है। क्रैश कोर्स जो 2026 में प्रीलिम्स देने वाले हैं। वो चाहे तो इस क्रैश कोर्स को ज्वाइन कर सकते हैं। 16 दिसंबर से यह शुरू हो चुका है। इसका एक डेमो वीडियो भी है पिटी के रूप में आदर्श सर का। आप उसको देख सकते हैं। जिसमें आपको सबसे बेस्ट फैकल्टी स्वयं मैं भी हूं इकोनमी में। पढ़ाया जाएगा और सबसे बड़ी बात है इसकी फीस की बात करें तो यह मात्र ₹6999 है। लेकिन यहां भी अगर आपने फर्स्ट वन के कूपन कोड का प्रयोग कर लिया तो आपको ₹2000 का और अतिरिक्त डिस्काउंट मिल जाएगा। यानी यह फीस ₹499 की हो जाएगी। डन। आइए समझते हैं। समझते हैं इस बात को। एक्चुअली अगर बात करें जापान की तो जापान ने क्या किया है? अपने ब्याज दर को बढ़ाया है। ब्याज दर को बढ़ाया है। क्या बढ़ाया है? 0.5% था ब्याज दर जिसको जिसमें प्लस 0.25% की वृद्धि हुई है। तो अब ये 0.75% हो गया है जापान में ब्याज दर और अब तक का यह 30 वर्षों का सबसे अधिकतम ब्याज है। 30 वर्षों का अधिकतम ब्याज दर है जापान में। अधिकतम ब्याज दर है किसका? जापान का। जैसे भारत का केंद्रीय बैंक आरबीआई होता है। इसी तरह से जापान का भी केंद्रीय बैंक है जिसको जापान का जो सेंट्रल बैंक होता है वो जापान का जो सेंट्रल बैंक है उसने ब्याज दर को बढ़ाया है। ठीक है ना? हर देश का एक केंद्रीय बैंक होता है। तो जापान का सेंट्रल बैंक जापानी या जापानी सेंट्रल बैंक कहलाता है उसको। तो ये क्या है इस खबर के मायने? आप इस बात को समझना। एक्चुअली क्या था कि जापान में 1995 के बाद 1995 के बाद अगर बात करें स्थिति को बात करें कि बाद की स्थिति को बात करें तो जापान में एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी और जापान में एक समस्या देखी जा रही थी और वह समस्या डिफ्लेशन की स्थिति देखने को मिल रहा था। डिफ्लेशन का मतलब होता है कहीं ना कहीं अपस्फीति। अपस्फीति का मतलब होता है वह स्थिति जहां मुद्रास्फीति दर जो होता है आप ऐसे समझिए कि अगर यह मुद्रास्फीति दर है और ये अगर नीचे चला जाए शून्य या शून्य से नीचे चला जाए नकारात्मक हो जाए या शून्य हो जाए तो हम इसको कहते हैं डिफ्लेशन की स्थिति और इसका बहुत बड़ा कारण होता है जब डिमांड में कमी आ जाती है बहुत ज्यादा तो कहीं ना कहीं जापान में ये स्थिति देखने को मिला है जापान में स्थिति देखने को मिला है तो वहां के जो केंद्रीय बैंक ने क्या निर्णय लिया कि वो अल्ट्रा क्या बोलते हैं इसको? अल्ट्रा सॉफ्ट पॉलिसी को अपनाएगी। अल्ट्रा सॉफ्ट पॉलिसी या लूज पॉलिसी को अपनाएगी। आखिर हमारे देश का केंद्रीय बैंक भी दो प्रकार की नीति अपना सकता है। एक सॉफ्ट एक हार्ड। सॉफ्ट मतलब ब्याज दर को कम करना। हार्ड मतलब ब्याज दर को बढ़ाना। सॉफ्ट क्यों? ब्याज दर को क्यों कम करना? ताकि उधार सस्ता हो। जमा का ब्याज कम हो ताकि लोग जमा ना करें। खर्च करें। इससे समवृद्धि दर बढ़ेगी। क्योंकि जैसे ही आप ब्याज दर को कम करेंगे आप ब्याज दर कम करेंगे तो इससे लोन भी सस्ता होगा। जमा पर ब्याज दर कम होगा। जमा पर ब्याज दर कम होगा। और जमा पर ब्याज दर कम होगा तो लोग बैंक में कम जमा करेंगे। ज्यादा खर्च करेंगे। लोन आसानी से लेंगे। इससे बाजार में तरलता बढ़ेगी। लोगों की डिमांड बढ़ेगी। मांग बढ़ेगा। तो मानी सी बात है कि उत्पादक वर्ग उत्पादन ज्यादा करेगा। उत्पादन ज्यादा करेगा तो जीडीपी बढ़ेगा और जीडीपी बढ़ेगा तो मेन मोटिव जो है वो क्या है? हमारे देश में समवृद्धि दर को बढ़ाना जो कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य था। इसीलिए हाल ही में केंद्रीय बैंक ने अपने ब्याज दरों को कम किया। 0 5.5 से घटाकर 5.25 किया। अब अब जरा बात को समझना। 1995 के बाद जापान ने अपने जो जापान के केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक नीति में मॉनिटरी पॉलिसी में अल्ट्रासॉफ्ट पॉलिसी को अपनाया। यानी ब्याज दरों को लगातार कम रखा। यहां तक कि वो ब्याज दर को कम करके आपको हां ब्याज दर को कम करके उसने क्या कर दिया? शून्य कर दिया। ब्याज दर को लगभग शून्य कर दिया। ठीक है ना? ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा खर्च करें, डिमांड बढ़े और अर्थव्यवस्था में समृद्धि दर बढ़े। और तो और 2016 की बात करें 2016 में तो जापान के केंद्रीय बैंक ने क्या किया? एक नया काम जापान के केंद्रीय बैंक ने अपने ब्याज दर को नकारात्मक कर दिया। नकारात्मक। नकारात्मक का मतलब आप समझ रहे हैं नेगेटिव। मतलब अगर आप उधार ले रहे हैं तो आपको कोई ब्याज नहीं देना है। आपको केवल मूलधन चुकाना है। प्रिंसिपल ही चुकाना है। और अगर आप जमा कर रहे हैं बैंक में तो बैंक आपको कोई ब्याज नहीं देगा बल्कि आप जमा करेंगे तो आपको ब्याज चुकाना पड़ेगा। तो बैंक में कोई क्यों जमा करेगा? तो ये नकारात्मक ब्याज दर नकारात्मक ब्याज दर को अपनाना शुरू कर दिया। हालांकि हालांकि 2024 में जाकर के जापान ने इसको पॉजिटिव कर दिया। 0.0.5% से पॉजिटिव किया ब्याज दर को और अब 25 बढ़ा के इसको 0.75% कर दिया। 0.75% किया। तो आखिरकार सवाल उठता है सवाल उठता है बात को समझना कि आखिरकार जापान ने अपने ब्याज दर को क्यों बढ़ाया? जापान ने ब्याज दर में वृद्धि अगर की तो उसका कारण क्या है? क्यों आखिर वृद्धि किया उसने? क्यों किया? तो उसके पीछे का सबसे मूल कारण समझिए कि जापान में जैसे भारत में मुद्रास्फीति दर जो है ये आरबीआई का कहना है या आरबीआई कहता है कि हमारे देश में मुद्रास्फीति अगर 4% रहता है 4% रहता है तो इसका मतलब है देश में समृद्धि दर बढ़ता है और देश का ग्रोथ बढ़ता है। क्योंकि मुद्रास्फीति बढ़ने से सामान्य मूल्य बढ़ेगा। उत्पादक वर्ग ज्यादा उत्साहित होगा। उत्पादन करने से जीडीपी बढ़ेगा, समृद्धि दर बढ़ेगा। तो 4% मुद्रास्फीति दर भारत के लिए जैसे बेहतर माना जाता है विकासशील देश के लिए। ठीक इसी तरह से जापान जैसे देश विकसित देश के लिए वहां मुद्रास्फीति एक से 2% का होना बहुत ज्यादा होता है। ठीक है? 1 से 2% मुद्रास्फीति दर है तो बहुत ठीक है। लेकिन कौन? ये जो मुद्रास्फीति है हेडलाइन मुद्रास्फीति होता है। लेकिन जापान में क्या देखा गया है? अभी इस वक्त वहां कोर इनफ्लेशन बहुत तेजी से बढ़ा है। कोर इनफ्लेशन जो है जापान में वहां पर 2% से अधिक हो गया। अब ये आप बोलोगे कि सर चिंता का क्या बात हुआ? एक से 2% तो होता ही है तो 2% से अधिक हो गया। तो क्या चिंता का बात है? चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि ये कोर मुद्रास्फीति बड़ा है और कोर मुद्रास्फीति में ज्यादातर हम उन वस्तुओं को बाद कर देते हैं जिनमें जिनके मूल्य में उतार-चढ़ाव बहुत जल्दी होता है। इसका मतलब है यहां स्थिर मूल्य वाले वस्तुओं का मूल्य तेजी से बढ़ा है। यानी यह स्ट्रक्चरल मुद्रास्फीति है। यह संरचनात्मक मुद्रास्फीति है और इसको दूर करना इतना आसान नहीं होता। इसको जाने में दूर होने में लंबा समय लग जाता है। इसीलिए कहीं ना कहीं इसको स्टिक इनफ्लेशन भी कहते हैं। इतना आसानी से नहीं जाता है। और जापान में जब यह कोर इनफ्लेशन बहुत तेजी से बढ़ रहा है तो वहां की सरकार को बहुत बड़ा निर्णय लेना पड़ा है कि अब यहां से हमें ब्याज दर बढ़ाना पड़ेगा ताकि हम अपने कोर मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकें। हम अपने कोर मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सके और यह बहुत जरूरी है अन्यथा पूरी अर्थव्यवस्था बहुत ज्यादा प्रभावित हो सकती है। तो जापान के केंद्रीय बैंक का यहां क्या उद्देश्य एक उद्देश्य है कि कोर इनफ्लेशन को कंट्रोल करना और दूसरा कहीं ना कहीं जापान अभी हाल ही में जापान में नेगोशिएशन खूब हुआ है। सैलरी को लेकर वेज को लेकर लोगों की वेज बढ़ी है। सैलरी बढ़ी है और जिससे क्या हुआ? बाजार में बहुत ज्यादा डिमांड बढ़ गया है। तो ऐसा ना हो कि उस डिमांड से मुद्रास्फीति दर जो एक से 2% होना चाहिए वो भी तेजी से बढ़ जाए। इसीलिए कहीं ना कहीं मुद्रास्फीति को भी नियंत्रित करने के लिए या बाजार में तरलता को नियंत्रित करने के लिए भी किया गया है। तरलता को नियंत्रित करने के लिए यह काम किया गया है। कि वहां ब्याज दर बढ़ा है और जापान के केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि यहां से और ब्याज दर बढ़ सकता है। कम नहीं होगा। सवाल यह उठता है आप देखिए एक तरफ जापान में केंद्रीय बैंक जो है जापान में और भारत में बात करें जापान में केंद्रीय बैंक जो है ये ब्याज दर को बढ़ा रहा है। ये ब्याज दर को बढ़ा रहा है। जबकि भारत में हम ब्याज दर को क्या कर रहे हैं? केंद्रीय बैंक क्या कर रहा है? ब्याज दर को कम कर रहा है। क्योंकि भारत में केंद्रीय बैंक का उद्देश्य क्या है अभी वर्तमान में कि समृद्धि दर को बढ़ाया जाए। कैसे भी समृद्धि दर को हम बढ़ाएं? क्योंकि हमारा मकसद है अपने जीडीपी को बढ़ाकर, समवृद्धि दर को बढ़ाकर हमें विकसित अर्थव्यवस्था की तरफ जाना है। हमें विकसित अर्थव्यवस्था बनना है। वहीं जापान जो है वो दूसरा चैलेंज फेस कर रहा है। जापान में चुनौती क्या है? जापान में चुनौती है कि लंबे समय से वहां डिमांड बहुत कम हो गया है। चीजों के दाम नहीं बढ़ रहे हैं। लोग चाहते हैं कि भाई यहां हमारी भी समृद्धि दर बढ़े। वहां पापुलेशन बहुत एजिंग हो गई है। बहुत ज्यादा बूढ़े लोग हैं। जबकि उसका भारत में देखा जाए तो जनस सांख्यिकी लाभांश हमारे देश में औसत आयु 29 वर्ष है। वहां औसत आयु 47 वर्ष है काम करने वाले लोगों की। तो बूढ़ी हो चुकी है वहां की जनसंख्या बहुत ज्यादा। यानी काम करने वाले लोग बहुत कम है। कहीं ना कहीं जापान में अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए यह काम किया गया है कि वहां ब्याज दर बढ़ाने का प्रयास किया है। अब अगर जापान अगर ब्याज दर को बढ़ा रहा है तो इसका जापान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? जापान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अगर जापान की हम अर्थव्यवस्था पर प्रभाव की बात करें तो पहला प्रभाव हम क्या देखते हैं कि ब्याज दर बढ़ेगा तो बॉन्ड का ईल्ड भी बढ़ेगा। जापान में बॉन्ड का ईल्ड भी बढ़ेगा। अब बॉन्ड का ईल्ड बढ़ेगा। इसका मतलब हो गया कि कहीं ना कहीं सरकार का सरकार का जो बोरोविंग लागत है या सरकार का उधार लेने का लागत है उधार लेने का लागत यह क्या हो जाएगा ये बढ़ जाएगा ये बढ़ जाएगा और इसका दबाव जो है दबाव पड़ेगा जापान की मुद्रा येन पर पड़ेगा क्योंकि डॉलर और येन में थोड़ा सा मूल्य में अंतर पाया जाएगा और इससे येन का मूल्य में थोड़ा गिरावट देखने को मिलेगा। येन के मूल्य में गिरावट देखने को मिलेगा। यह बहुत बड़ी बात है। समझना इस बात को। एक्चुअली जापान को अगर हम देखें पूरे विश्व में तो जापान को पूरे विश्व में एक सोर्स ऑफ कैपिटल माना जाता है। सोर्स ऑफ कैपिटल माना जाता है। व्हाई जापान इज कॉल्ड द सोर्स ऑफ कैपिटल इन द वर्ल्ड। दिस इज वेरी इंपॉर्टेंट। इसको समझना। यहां समझना एक इंपॉर्टेंट टर्म मैं पढ़ाने जा रहा हूं, समझाने जा रहा हूं जिसका नाम है कैरी ट्रेड विद जापान। कैरी ट्रेड विद जापान और या वि येन। इसको बोल सकते हैं जापान या येन जो जापान की मुद्रा है जैसे भारत की रुपया मुद्रा रुपया है। तो ये कैरी ट्रेड होता क्या है? कैरी ट्रेड के कांसेप्ट को समझना। एक्चुअली जापान में ब्याज दर बहुत कम है। बहुत कम है। तो विश्व के देश भारत भी इसमें इंक्लूड करता है। ये क्या करते हैं? जापान से सस्ते ब्याज दर पर उधार लेते हैं। या तो ये क्या करते हैं? बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में निवेश करते हैं और या तो क्या करते हैं? बाहर कहीं निवेश करते हैं। जैसे मैं एग्जांपल समझाता हूं। मान लीजिए ए और बी। ए में मैं जापान रख लेता हूं। डन। अब मान लेते हैं कि B जापान से उधार ले रहा है और यहां उधार का ब्याज दर उसको मिल रहा है। मान लेते हैं 0% में मिल रहा है या मान लेते हैं बहुत कम 1% ले लेते हैं 1%। ठीक है? अब B क्या कर रहा है? इससे उधार लेकर इसको निवेश कर दे रहा है। और निवेश करके B को 4% का ब्याज मिल रहा है। B को 4% का ब्याज मिल रहा है। तो B ने खड़े-खड़े कितना कमा लिया? 3% कमा लिया। इसको कहा जाता है कैरी ट्रेड और कैरी ट्रेड विद जापान विश्व में बहुत ज्यादा होता है। इसीलिए जापान को विश्व में सोर्स ऑफ कैपिटल कहा जाता है। क्यों? क्योंकि यहां अत्यंत कम ब्याज पर उधार मिल जाता है। कम ब्याज पर उधार मिल जाता है। तो सर इससे क्या प्रभाव पड़ेगा? सोचो। क्या जापान में अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाएगा तो क्या अब कैरी ट्रेड विद जापान करना बहुत आसान होगा? अब तो यहां भी ब्याज दर बढ़ जाएगा। अब यहां पर भी उसको 3% 4% में ब्याज पर उधार मिलेगा। तो ऐसे में जो बाजार से वो आर्बिट्रास कर रहा था। इसको बोलते हैं आर्बिट्रास करना। लाभ उठाना कि 1% लेकर 3% में बेच देना या 3% में निवेश कर देना और 2% का लाभ ले लेना। अब वो आर्बिट्राज वो लाभ नहीं ले पाएगा। ठीक है? तो इसका मतलब इसका मतलब अगर हम केवल भारत की बात करें कि भारत पर प्रभाव विश्व पर प्रभाव तो पड़ेगा ही पड़ेगा कि कैरी ट्रेड करना इतना आसान नहीं होगा। लेकिन भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा जो हमारे लिए मेन मुद्दा है। हमें समझना है कि आखिरकार जापान ने ब्याज दर बढ़ाया तो भारत पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा। नंबर वन अगर बात करें तो वही कि कैरी ट्रेड करना अब आसान नहीं होगा। कैरी ट्रेड अब क्या हो जाएगा? महंगा हो जाएगा। अधिक महंगा हो जाएगा। ब्याज दर बढ़ेगा तो यह ज्यादा महंगा होगा। यह कम हो जाएगा और जिसका नुकसान भारत को होगा। क्योंकि हमारे बहुत सारे प्रोजेक्ट जापान से उधार लेकर होते हैं। बहुत सारे हमारे यहां पर ऐसे लोग हैं जो जापान से उधार लेकर बाहर निवेश करते हैं। तो अब वो नहीं कर पाएंगे। उनके लिए महंगा काम हो जाएगा। नंबर वन, नंबर टू। नंबर टू की बात करें तो क्या प्रभाव पड़ेगा? सबसे बड़ा प्रभाव क्या पड़ेगा? बात को समझना कि अगर जापान में ब्याज दर बढ़ेगा, ब्याज दर बढ़ेगा तो मानी सी बात है कि जापान में अब निवेशकों को निवेश करना ज्यादा आसान होगा। ज्यादा लाभ मिलेगा। तो इससे क्या होगा? भारत के जो एफपीआई हैं, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर, यह क्या होगा? इनका बहिरप्रवाह बढ़ जाएगा। बहिरप्रवाह और ज्यादा बढ़ेगा। इनको लगेगा कि भारत के स्टॉक मार्केट में क्यों निवेश करें? यहां उतना ब्याज तो मिलेगा ही नहीं। यहां उतना इंटरेस्ट या लाभ तो मिलेगा ही नहीं। क्यों ना जापान का ब्याज दर बढ़ा है तो जापान में चले तो जापान में ज्यादा ब्याज मिलेगा और ये तो होते ही हैं हॉट मनी इन्वेस्टर। ये तुरंत जापान की तरफ मूव करेंगे। इससे भारत में डॉलर का क्या होगा? एफपीआई का बहिर प्रवाह होगा। डॉलर का बहिर प्रवाह होगा जिसका प्रभाव फॉरेक्स पर पड़ेगा। फॉरेक्स कम होगा। फॉरेक्स पर इसका दबाव पड़ेगा। और सबसे ज्यादा दबाव जो झेलेगा सबसे ज्यादा दबाव रुपए कि रुपए का मूल्य ह्रास यानी रुपए का जो डेप्रिसिएशन है यह और बढ़ेगा। आज रुपया 9092 तक हो गया। 9192 तक हो गया। यह और गिरने की अब संभावना केवल जापान के इस कदम से हो सकता है। केवल जापान के इस कदम से हो सकता है। हालांकि जापानियों को इसका लाभ मिलेगा क्योंकि जापानी अब ज्यादा मूल्य पर वस्तु खरीदने के लिए तैयार है जो पहले नहीं होते थे। क्योंकि जापानियों को लग रहा है ऐसा कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था जो बहुत दिन से डिफ्लेशन में थी अब उससे बाहर आएगी और अर्थव्यवस्था जो सुस्त अर्थव्यवस्था उससे आगे बढ़ेगी और जो आज जापान हमसे चौथे से पांचवें में हो गया है आईएमएफ के रिपोर्ट के अनुसार एक्चुअली इसी साल आईएमएफ का रिपोर्ट आया है और आपको पता होगा कि आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार अब चौथी अर्थव्यवस्था जीडीपी के आधार पर नॉमिनल जीडीपी के आधार पर कौन हो गया है भारत हो गया है और हमने किसको पीछे छोड़ दिया जापान को पीछे छोड़ दिया। लगभग दोनों का ही 4 ट्रिलियन है। लगभग लगभग सेम है। लेकिन जापान में मंदी होने के कारण जापान पीछे हो गया। अब इस कदम से जापान की अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार लेगी और हो सकता है वो हमें बीट कर दें। वो वापस चौथे नंबर में आ जाए और हम पांचवें नंबर में वापस चले जाएं। और ये होना कोई बड़ा बात नहीं है। कोई ये बड़ा संकेत नहीं है। हो सकता है आने वाले आप समय में तुरंत सुन भी लेंगे कि भारत पांचवें नंबर में आ गया और जापान बीट करके चौथे नंबर में चला गया। तो यह है पूरा एनालिसिस। आप इसको समझिए। दिस इज वेरीेंट फॉर ऑल ऑफ यू। थैंक यू सो मच। ऑल द बेस्ट। बाय-ब।

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Japan has raised its interest rate to the highest level in decades, while India is moving towards reducing interest rates. What does this major shift mean for the global economy and India’s growth? In this video, Rishi Jain Sir from OnlyIAS Hindi explains Japan’s interest rate hike, India’s monetary policy stance, and their impact on inflation, currency, trade, investments, and UPSC-relevant world economy concepts. Understand how global interest rate changes affect India, emerging markets, and future economic stability. This analysis is crucial for UPSC, State PCS, and competitive exam aspirants.

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32 Comments

  1. 😂 February se US ke against jane hai india ko chahe jitne bhi karle india US ne terrif se EU ko nahi india ko hi barbad toh india ko US se Social media ecommerce retailers demands ko bhi
    Desh ke paise desh ke bahar mein goods products par nahi

    Politicians ke salary ko unke balanced liye hue decesions ke sath related karne hai jitne desh ke future ko secure karne mein hone hai se hone koi reports card toh koi parameters hai bhi nahi
    Decesions makings desh ke future mein logically hone tabhi aur jo kaam kam kare ya jinke liye kaam kam hai unke liye aur bhi kaam ya unke liye scheme ho ki unke salary ke percentage ko kitne years tak kitne percentage ko government rakhne ke liye
    Towns smalltowns rulral ara mein

  2. Sir please select 360 me coupon code available kra dijiye kyoki mne liya tha srijan prelims crash cours lekin mujhe pata nhi tha ki select 360 sath me Lena hai or galti se peyment fundamental vale me ho gya hai or live class nhi mill rhi hai or mujhe coupon code available nhi kra rhe hai please sir ji please I request you sir ji please 😢 coupon code available kra dijiye select 360 me please sir ji 😢

  3. My favourite teacher 🙏🙏🙏🙏🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗💯💯💯💯💯💯💯🤗🤗🙏🌼🌼🌼🌺🌺🌼🙏🙏🤗

  4. Thank you sir best teacher in the world 🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉❤🌷🌹🌹🌺🌺💐💐💐❤️😇