India Replaces Japan’s Own Economy | Why Japan’s Mega Banks Are Betting BIG on India | Amber Zaidi

जय हिंद नमस्कार मैं अंबर ज़दी स्वागत करती हूं आप सबका एक बार फिर से हमारे आज के कार्यक्रम में दोस्तों जापान के मेगा बैंक्स जो कभी टोक्यो और ओसाका के कंफर्ट जोन में काम किया करते थे आज मुंबई गिफ्ट दी और इंडियन एमबीएफसी के दरवाजे पर लाइन लगाकर खड़े हुए हैं और जो एसएमबीसी का ये yes बैंक में एंट्री हो या एमयूजी एमयूएफ एफ जी का जो श्री राम फाइनेंस है उस पर दाव लगाना हो ऐसे कई सारे जो इन्वेस्टमेंट्स है वो भारत में नजर आ रहे हैं। यह स्ट्रेटेजिक रिलेशन ऑफ कैपिटल है या और कुछ इसके कई सारे सवाल निकलते हैं। जापान को अचानक इंडिया में इतना अट्रैक्टिव जो इन्वेस्टमेंट है वो क्यों लग रहा है और क्या इसके पीछे का कारण है? क्या ये इंडिया के ग्रोथ पर वोट ऑफ कॉन्फिडेंस है या जापान की मजबूरी क्योंकि इसके पीछे कई सारे रिपोर्ट्स है उसको हम आगे चर्चा में शामिल करेंगे और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इंडिया सिर्फ कैपिटल ले रहा है या कंट्रोल भी दे रहा है और इसी पर आज हम सवाल पूछेंगे जापान इंडिया में क्या ढूंढ रहा है और इंडिया जापान को क्या दे रहा है और इस पर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद है उमेश जी उमेश जी बहुत स्वागत है आपका जय हिंद नमस्कार जय सियाराम जी जय सियाराम उमेश जी उमेश जी सच है क्या ये जो रिपोर्ट सामने आ रही है कि जो जापान की क्योंकि इसके पीछे का जो मैं कारण है उससे स्टार्ट करती हूं जो कि हम रिपोर्ट अक्सर आती रहती है जापान के हवाले से क्या ये बात सच है कि जापान की इकॉनमी जो है वो डिकेड से नियर जीरो ग्रोथ में अटकी हुई है। तो क्या जापान की जो बैंक्स है वो इंडिया में इसीलिए आ रहे हैं क्योंकि इंडिया में जो पूरा सारा कुछ नजर आ रहा है वो ग्रोथ है वो काफी स्ट्रांग है और जापान के पास कोई और ऑप्शन नहीं है। यूएस का पता ही है कि वो अपने अलायंस का पैसा यूज करता है देता कुछ नहीं है। देखिए आपने बराबर बोला है जापान के यहां पर एक जीरो% ग्रोथ है फॉर द पास्ट 25 इयर्स और 99 से ले 2024 तक उन्होंने 0.4% ग्रोथ उनकी हुई है। जापान के अंदर एक टाइम तो ऐसा हो गया था नेगेटिव इंटरेस्ट रेट हो गया था। वहां पर लोग अपना पैसा रखने के लिए बैंक उधर चार्ज करने लग गए थे। इसी के कारण जापान के अंदर बोलते हैं द लॉस्ट डिकेड द लॉस्ट जनरेशन ऑफ ग्रोथ। अब जब से देखिए नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई थी 2014 में और उसके बाद जापान से हमारे रिश्ते एक तरह से बेहतर होते जा रहे हैं। आप ये देखिए कि जापान के अंदर एजिंग पपुलेशन है। वहां पर ग्रोथ की जो सीमाएं हैं वो बहुत ही कम है। मतलब आप ज्यादा ग्रोथ कर नहीं सकते। कंट्री पूरी डेवलप हो चुकी है। उनके पास एक्सेस कैपिटल पड़ा है। उनको नहीं मालूम किधर रखना। तो उन्होंने आज यूएस डेप्थ में सबसे ज्यादा जो कंट्री ने यूएस ट्रेजरी होल्डिंग्स होल्ड कर रहा है वो जापान है। 1.1 ट्रिलियन डॉल अमेरिकन बोंड्स में इन्वेस्ट करके रखा है। अब जापान चाहता है कि उसकी इकॉनमी में उसके इन्वेस्टमेंट्स डवर्सिफाई करें और इसी के लिए वो चाहता है एक नया मार्केट चाहता है जहां पर एक रोबस्ट ग्रोथ हो। भारत के अंदर एक तरह से डिमांड हो। भारत एक फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी है। आज भी हमारा जो सेकंड क्वार्टर है उसमें वी हैव रिकॉर्डेड अ ग्रोथ रेट ऑफ 8.2% अब देखिए कंपेयर करिए कहां 0.4% एंड कहां 8.2% भारत और जापान की इकॉनमी की जो साइज है वो मोर और लेस सेम है। आज दोनों फोर्थ और फिफ्थ पोजीशन में है। कभी जापान ऊपर होता है, कभी इंडिया ऊपर होता है। चार ट्रिलियन हमारी भी है, चार ट्रिलियन जापान की भी है। बट भारत के अंदर जो है एक स्थिर सरकार आई है। एक डेवलपमेंट ओरिएंटेड सरकार आई है। एक एनेबल सरकार आई है जिसमें वो ग्रोथ को तरफ जी भारत और जापान की इकॉनमी आज एक ही टाइप की है। मतलब उनकी वैल्यू दोनों की एक ही है। 4 ट्रिलियन डॉल की है। कभी भारत आगे होता है, कभी जापान आगे होता है। पर जापान के अंदर सेचुरेशन है। और जबकि भारत के अंदर बहुत स्ट्रांग क्रेडिट ड्रिवन ग्रोथ है। भले ही आप देख लीजिए लोग यहां पर एस्पिरेशनल होते जा रहे हैं। इंडिया की डेमोग्राफिक जो है वो इट इज अराउंड 67% जो हमारी पपुलेशन है इट इज बिलो द एज ऑफ़ 35 वी आर हैविंग अ डेमोग्राफिक डिविडेंड और यहां पर लोग चाहते हैं कि वो अच्छी लाइफस्ट के लिए वो चाह रहे हैं और इसी के अंदर आप देखिए एक तो इनकम ग्रोथ है। सेकंड डिमांड भी है और एक तरह से क्रेडिट भी एक तरह से लोग यहां पर मांग रहे हैं। तो भारत के अंदर एक बहुत बड़ा एक वर्ग है। जहां पर जापान को लग रहा है कि हम अपना पैसा अगर इंडिया की इकॉनमी में लगाएं। हम उनके जो इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाएं, हम उनके जो बैंकिंग सेक्टर में लगाएं, उनकी एमबीएससी में लगाएं। तो इससे फायदा दोनों कंट्री के बीच में हो सकता है। अब आप ये देखिए कि भारत के अंदर एक स्थिर सरकार आने से एक एक तरह से क्लियर वोट मैप आने से जापान ने भारत के अंदर बुलेट ट्रेन में इन्वेस्ट किया था। 2015 या 16 में एक प्रोजेक्ट डिसाइड हुआ था और इसके अंदर 1 लाख करोड़ एक लाख करोड़ कम से कम मेरे ख्याल से 15 बिलियन डॉलर के आसपास कुछ है। जापान हमको 0.1% इंटरेस्ट में दे रहा है। और आप सोचिए हमको रीपेमेंट पीरियड कितनी है? 15 प्लस 50 इयर्स 65 इयर्स के लिए हमको दे रहा है। अब सबसे बड़ी बात यह है कि 15 साल फर्स्ट 15 इयर्स तो हमको ब्याज भी देने की जरूरत नहीं है। उसके बाद 50 साल तक हम उनको 0.1% पे हम उनको पैसा देने वाले हैं। ये एक लॉन्ग टर्म कैपिटल जो इन्वेस्टमेंट है भारत के अंदर होने वाला है। जिसके कारण आप देख रहे हैं भारत के अंदर बुलेट ट्रेन की एक सपना पूरा हुआ है। जबकि आप देख रहे हैं ना जो पीआरआई में जो इंटरेस्ट रेट देता है तीन से 4% तक देता है। आपको बता देता हूं और उसके अंदर भी उनकी जो ड्यूरेशन है वो 20 साल है। यहां पर कितनी है? 65 साल। तो भारत को एक तरह से विन विन डील है। यंग डिफरेंस है बिटवीन व्हाट मोदी जी डस व्हाट राहुल गांधी वुड हैव डन। ठीक है? राहुल गांधी की जो पार्टी है कांग्रेस पार्टी उन्होंने चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी के साथ 208 में एक एग्रीमेंट साइन किया था। उसके अंदर उन्होंने भारत के अंदर भारत की इकॉनमी को डिस्ट्रॉय कर दिया था। हमने यहां पर जितनी मैन्युफैक्चरिंग दो तीन होनी चाहिए थी वो खत्म हो चुकी थी। हम सारी चीज वी डिपेंड वी बिकम डिपेंडेंट ऑन चाइना फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम। आज भी हम उस सबर से नहीं उभर पा रहे हैं। ये राहुल गांधी की पार्टी ने किया था कांग्रेस पार्टी ने 208 में और ये चीज बताता है कि भारत के ऊपर एक तरह से लोगों को एक तरह से विश्वास है अंबर जी। देखिए बिलकुल मनीष जी ये तो यहां पर है कि लो इंटरेस्ट रेट्स है एजिंग पापुलेशन श्रिंकिंग वर्क फोर्स और जापान की जो डोमेस्टिक बैंकिंग है वो ऑलमोस्ट डेड मनी बन चुकी है। तो ऐसे में ये बात तो जो आप कह रहे हैं वो समझ में आती है कि जो इंडिया जो है वो उनके लिए हाई यील्डिंग अल्टरनेटिव बन चुका है। अब यहां पर उमेश जी जो दूसरा अलग अहम बात है वह जो मैं आपसे पूछना चाहती हूं और यह ध्यान देने वाली बात है कि जो जैपनीज बैंक है वो सिर्फ कमर्शियल बैंक्स नहीं बल्कि एनबीएफसी इन्वेस्टमेंट बैंक्स और जो डिजिटल लेंडर्स है वो सब में घुस रहे हैं। तो सवाल ये है कि क्या उन्हें लग रहा है कि इंडिया का जो रियल ग्रोथ है वो रेगुलेटेड बैंक्स के बराबर हो रहा है? देखिए मैं कुछ फिगर्स देना चाहता हूं हमारे दर्शकों को। जो जापान के अंदर सुमित सुमितोमो मुत्स फाइनशियल ग्रुप है। उन्होंने अभी Yes बैंक के अंदर 13843 करोड़ की इन्वेस्टमेंट की है। एसएमबीसी एशिया राइजिंग फंड उन्होंने शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक में 4.99% स्टेक लिया है अगस्त में और यह भी देख लीजिए एसएमएफसी इंडिया क्रेडिट एंड डीएमआई फाइनेंस के अंदर भी इन्वेस्टमेंट्स होते जा रहे हैं। अभी जो न्यूज़ आई है मच्छु भोशी यूएसजी फाइनशियल ग्रुप उन्होंने 20% स्टेक लिया है श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड में 3968 करोड़ में आप ये देखिए जापान की MSO फाइनशियल ग्रुप है उन्होंने अभी कंट्रोलिंग स्टेक लिया है एक होम क्रोन वीसी फंड में एवेंडर्स में उन्होंने वहां पर 4720 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया है। देखिए जापान इतना सारा इन्वेस्टमेंट कर रहा है। ये समझ में आता है कि भारत के अंदर जैसे मैंने बताया डेमोग्राफी डिविडेंड है हमारा 35% हमारी जो 67% पपुलेशन है इट इज बिलो द एज ऑफ़ 35 एंड दिस इज द ड्राइवर आउट ग्रोथ एंड सेकंड एक स्थिर सरकार है एक क्लेरिटी है एक ग्रोथ ओरिएंटेड सरकार है जो इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्ट करता है। आपको मालूम है इंफ्रास्ट्रक्चर में अगर इन्वेस्टमेंट होता है तो उसके कारण जो डिमांड होता है वो इकॉनमी में बढ़ता है। लोगों की सहूलियत हो जाती है। देखिए जैसे यूपी के अंदर एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। दिल्ली के अंदर आप देखिए कि रोड सही हो रहे हैं। देश भर के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर में इंप्रूवमेंट हो रहे हैं। रेयर बनते जा रहे हैं। पोर्ट्स बनते जा रहे हैं। फिर बाद में आप ये भी देख रहे हैं कि जो रैपिड इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपेंशन हो रहा है। उससे फायदा लोगों को होता है। पीपल की लाइफ इजी हो जाती है। लोग ज्यादा मतलब डेवलपमेंट होता है, इन्वेस्टमेंट आता है, जॉब क्रिएशन होता है। लोगों की इनकम बढ़ती है। जापान को भी मालूम है कि भारत के अंदर इन्वेस्टमेंट करने से फायदा होता है। इसका मतलब यह है कि जापान भारत के अंदर एक रिलायबिलिटी समझ में आता है। इतने बड़े इन्वेस्टमेंट कभी भी जापान ने नहीं किया। हमने मुझे याद है कि रनबक्सिंग ग्रुप में डीआची ने जब इन्वेस्ट किया था उस समय रेगुलेटरी हर्डल्स आए थे। इनफ जापान ने यूपीए की सरकार के अंदर तो जापान ने क्वेश्चन किया था यूपीए की सरकार को कि आपके अंदर आपको करप्शन से आपको करप्शन करना है या डेवलपमेंट करना है? यह डिफरेंस है। देखिए जब तक आप डेवलपमेंट ओरिएंटेड सरकार होती है उसी के बाद आप इतने सारे इन्वेस्टमेंट्स हो रहे हैं। और ये तो मैं आपको बता रहा हूं दिल्ली मुंबई रेल कॉरिडोर जो है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उसके अंदर भी जैपनीज इन्वेस्टमेंट आया है। जापानीज इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एजेंसी जो जीका है वो भी भारत के अंदर मेट्रो स्टेशन में इन्वेस्ट कर रही है। जापान हमको सॉफ्ट लोन दे रहा है। 1% 1.1% मतलब इतने कम ब्याज पे दे रहा है कि उसको मालूम है कि भारत में पैसा उसका सेफ है। क्योंकि जापान को वो पैसा जापान में रखने से फायदा नहीं होने वाला। वो भारत में इन्वेस्ट करेगा तो भारत के अंदर उसको एक तरह से स्ट्रेटेजिक कंट्रोलिंग स्टेक मिल रहा है और इससे हमें भी समझ में आ रहा है जापान जो है एक तरह से भारत की डेवलपमेंट में ग्रोथ में एक एक स्टेक होल्डर बन रहा है। जी उमेश जी एक समय था जब आरबीआई जो है वो फॉरेन बैंक्स के लिए एंट्री पर बहुत कॉशस रहता था और आज वही आरबीआई 20 से 24 25% तक स्टेक जो है उसको ग्रीन सिग्नल दे रहा है। सवाल यह है कि आरबीआई को इंडियन बैंक्स की जो कैपिटल रिक्वायरमेंट है फॉरेन मनी के बिना पूरी नहीं होती दिख रही है और जो माइनॉरिटी स्टेक बोल का जो कंफर्ट दिया जा रहा है और जो 24.99% स्टेक के साथ जो स्ट्रेटेजिक कंट्रोल के बिना जो प्रमोटर किया जा रहा है ये सारी चीजें ये कैसे पॉसिबल हो जाता है? देखिए यही तो बड़ी बात है कि आरबीआई जो है वो इतना कोशियस रहता है रहता है उसको भी समझ में आ गया देश के अंदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करना है तो आपको कैपिटल चाहिए भारत सरकार का मैं आपको बता देता हूं टोटल रेवेन्यू साल में होता है 36 लाख करोड़ और हमारे जो खर्चे हैं 50 से 52 लाख करोड़ है 16 लाख करोड़ का डेफिसिट हर साल होता रहता है कहीं ना कहीं सरकार को अपना फिसिकल डेफिसिट भी कम करना है इसके लिए देखिए सरकार क्या करती अपनी जो पीएसयू में है उसके अंदर डायरेस्टमेंट करती है ताकि उसका जो खर्चा है वो निकल सके और डेप्थ को एक तरह से कम कर सके और आपको फॉरेन कैपिटल की जरूरत है और ये जो पैसा आता है जो जापान का पैसा आता है वो बहुत सालों के लिए रहता है। देखिए हम ये देखते हैं कि जो एक बार रिपोर्ट्स आ रही है कि 2025 में एफआईआई ने भारत के स्टॉक मार्केट में ₹1600 करोड़ की सेलिंग की है। जिसके कारण हमारा रुपया 91 तक आ गया है। लोग ऐसे बात कर रहे हैं। पर जापान का ये जो पैसा आया है जो मैंने हजारों करोड़ की बात की है। इट कम्स फॉर अ वेरी लॉन्ग टाइम। मतलब कम से कम 20 साल के होराइजन के हिसाब से वो इन्वेस्टमेंट करते हैं। ऐसा स्टेबल कैपिटल हमें चाहिए। हमें ऐसा कोई कैपिटल नहीं चाहिए जो मतलब हॉट मनी होता है ना वो ओवरनाइट वेनिश हो सकता है। ये कमिटेड इन्वेस्टमेंट है। इसमें क्या रियलिस्टिक चेंजेस आते हैं। जापान वैसा इन्वेस्टमेंट करता है जिसमें उसका भी वैल्यूएशन बढ़े और जो कंट्री उनसे लोन लेता है वो भी डेप्ट ट्रैप में ना फंसे। चाइना क्या करता है? पाकिस्तान को उसने डे ट्रैप कर दिया। उसने श्रीलंका को डे ट्रैप कर दिया। बांग्लादेश को डे ट्रैप कर दिया। उसने को डेप ट्रैप कर दिया। चारों कंट्रीज इवन मालदीव्स को भी डे ट्रैक कर दिया। फिर बाद में वहां पर जाके स्ट्रेटेजिक एसेट्स के ऊपर वो अपना वो स्ट्रेटेजिक एसेट्स अपने नाम करवा देता है। जैसे क्वादर पोर्ट हुआ, अंबडोडा पोर्ट हुआ मालदीव्स के अंदर कर देता है। बांग्लादेश के अंदर भी वो चिड़गोंग पोर्ट मांग रहा है। तो अंबर जी ये सब देखिए जापान जो करता है इसके अंदर जो होता है शायद इंटरेस्ट होता है। मतलब डेवलपमेंट दोनों लोगों का होता है। म्यूचुअल डेवलपमेंट होता है। जबकि चाइना जो करता है डे ट्रैप करता है। दिस इज द टाइप ऑफ इन्वेस्टमेंट जापान कर रहा है। और एक और एक चीज है। जापान और इंडिया दोनों कॉड के मेंबर्स हैं और उनका दोनों का एक तरह से स्ट्रेटेजिक एनिमी देखिए लोग बोलते नहीं है एनिमी इतना पर मेरा मानना है चाइना जो है एनिमी है भले ही हम डिप्लोमेटिक लैंग्वेज में जिओपिलिटिकल लैंग्वेज में लोग इतना क्लियर कट नहीं बोलते पर मैं हमेशा यही बोलता हूं पे भरोसा कर सकते हो चाइना पे नहीं कर सकते और आज अच्छा अब मैं एक और सवाल आपके सामने और एक प्रोस्पेक्टिव रखना चाहती हूं कि आपने भी ये सारी चीजें बोली है लॉन्ग कैपिटल, रिस्क मैनेजमेंट, ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेस ये सारी चीजें बहुत सुनने में बड़ी अच्छी लगती है। लेकिन सवाल ये है कि क्या इंडियन बैंक सिर्फ कैपिटल हंगरी पार्टनर्स बन के रह जाएंगे? और कल अगर क्रेडिट साइकिल टाइट होता है तो क्या ये जो फॉरेन बैंक्स इंडिया में कमिटेड रह पाएंगे या सबसे पहले भागने वाले यही होंगे? देखिए जब क्रेडिट टाइपनिंग होगी जो स्टॉक मार्केट में जो एफआईआई और एफबीआई का इन्वेस्टमेंट आता है वह बेच के निकलते हैं। ये जो इन्वेस्टमेंट होता है कमिटेड होता है। मतलब आप दो टू डिकेड्स थ्री डिकेड्स के लिए कमिटमेंट होता है। और ये जब इन्वेस्टमेंट करते हैं बाद में ये लोग निकलते नहीं है। यहां पर बाकी सेक्टर्स में भी इन्वेस्टमेंट करते हैं। पहले जापान जो करता था इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में ज्यादा करता था। अब वो कमर्शियल बैंकिंग में भी आ चुका है। भारत की क्रेडिट ग्रोथ में वो एक तरह से इनवॉल्व हो रहा है। डायरेक्टली आप सोचिए कि जैपनीज पैसा हमें क्रेडिट मिल रहा है। भारत की जनता को वो क्रेडिट मिल रहा है। और जापान के और हमारी जनता उस क्रेडिट को यूज कर रही है फॉर बाइंग ऑल द इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स, टू व्हीलर्स एंड अदर थिंग्स जिसके कारण कंजमशन लेट ग्रोथ हो रहा है। इसमें फायदा किसका है? हमारी कंपनीज का भी है, हमारे जो कस्टमर्स है उनको भी है और जापान को भी है। इट्स अ विनविन सिचुएशन फॉर एवरीवन। इसके लिए बोलते हैं दिस इज द पार्टनरशिप इंडिया और जापान का पार्टनरशिप दे आर नेचुरल पार्टनर्स। जापान इतने साल इंडिया में इसके लिए इन्वेस्ट नहीं करता था क्योंकि भारत की सरकारें जनरली नरेंद्र मोदी से पहले वाली सरकारें सब करप्ट होती थी। देखिए सी डब्ल्यू सी जी के स्कैम को आपको मालूम ही होगा 2012 में जो लोग नहीं जानते थे उस समय टॉयलेट पेपर अमरजीत ₹000 में लिया था सोचिए बाथरूम का टॉयलेट पेपर ₹000 में ये ऑलरेडी है मैं कुछ गलत नहीं बोल रहा हूं आप जाके चेक कर सकते हैं ये तो डिक्लेयर्ड है बाकी सब चीजें ये तो बेसिक चीजें है बाकी सोचे कितने इनफ्लेटेड कॉस्ट पे कांग्रेस के टाइम पे ये किया था ऐसा जब लार्ज स्केल क्लंडर होता है तो कौन सी कंट्री कौन सी कंट्री आपको पैसा देगी उस समय तो कांग्रेस का उस समय मैं एक और भी बता देता हूं। कांग्रेस का सीक्रेट अलायंस था पाकिस्तान की आईएसआई के साथ। इसी के द्वारा हमारी जो प्लेट्स थी जो करेंसी प्लेट्स थी उनको दिया गया ताकि भारत के अंदर एक तरह से जाली नोटों का शिकंजा भारत के अंदर बनाना पड़ा और इसके लिए हमको 2016 में नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट को डीमोनेटाइजेशन करना पड़ा। दिस इज अ डिफरेंस। मैं यह बता रहा हूं और नरेंद्र मोदी जी के आने के बाद आप देखिए जापान के साथ हमारे रिश्ते सिद्रेट हुए हैं और इवन हम तियांजिन से जाने से पहले नरेंद्र मोदी जी पहले जापान गए थे फिर बाद में चाइना गए थे तो इसका मतलब देखिए कितना स्ट्रेटेजिक रिलेशनशिप होता है। जापान में हमको फाइटर इंजन का हमको टेक्नोलॉजी देने के लिए रेडी हो गए हैं। वो बोल रहे हैं हम साथ में डिफेंस सिस्टम्स करते हैं। ये तो मैं और ज्यादा चीजें बता रहा हूं। रेत मिनरल्स में भी जापान हमको टेक्नोलॉजी देने को तैयार है। हमारे नॉर्थ ईस्ट में भी बहुत इन्वेस्टमेंट कर रहा है। जापान का इन्वेस्टमेंट कोपरेशन एजेंसी जीका। जी उमेश जी जापान की जो बैंक्स है वो तो भारत में आ रही है। लेकिन फैक्ट ये भी है कि जो जापान में सिर्फ भारतीय जो बैंक्स है वो दो बैंक्स हैं। एसबीआई और बीओआई बैंक ऑफ इंडिया। वो भी लिमिटेड ऑपरेशंस के साथ। तो सवाल यह है कि अगर इंडिया इतना अट्रैक्टिव है तो इंडियन बैंक्स जापान में स्केल क्यों नहीं कर पा रहे हैं? रेगुलेटरी एसिमिट्री बोले या स्ट्रेटेजिक वीकनेस? देखिए सबसे पहले तो आपको एक्सपेंड करने के लिए क्रेडिट यहां पर चाहिए। जापान में तो सैचुरेशन पॉइंट आ चुका है। वहां की बक्स के पास पैसा पड़ा है। आप ये देखिए जापान का जो डोमेस्टिक डेप्ट है 252% ऑफ द जीडीपी है। उनका एक्सटर्नल डेप्ट नहीं है। मतलब लोगों के पास इतना पैसा है समझ लीजिए कंट्री से ज्यादा उनकी बैंक डिपॉजिट्स है। मतलब ₹100 अगर कंपनी कंट्री की वैल्यू है। 250% तो बैंक में डिपॉजिट्स है। सोच लीजिए। इतना ज्यादा उनके ऊपर वो किया है। एक्सेस कैपिटल है। मैंने आपको पहले भी बोला था कि बैंक में फंड बैंक में पैसा रखने के लिए बैंक उनको चार्ज करती थी। मतलब अगर आप ₹1 करोड़ रखो तो आपसे कम से कम कुछ मतलब साल का ₹1 लाख ले लेते थे। ऐसा मैं बता रहा हूं। मैं इसे एक एग्जांपल के लिए बता रहा हूं। यहां पर पैसे देती है बैंक। वहां पर पैसे ले रही है। डिफरेंस है। देखिए क्योंकि बैंक को पैसा नहीं चाहिए। क्या करेंगे? और जापान के अंदर एजिंग पपुलेशन है और जापान के अंदर लोग क्या है? सोच समझ के खर्चा करते हैं। वो अमेरिका के जैसे नहीं है कि वहां पर आप मल्टीपल कार्स ले ले, मल्टीपल पार्टनर्स हो जाए, मल्टीपल बच्चे हो जाए वैसा नहीं करते। वहां की फैमिली सिस्टम्स जो है भारत के जैसे आइडेंटिकल है। इट्स अ सेविंग इकॉनमी। उनको मालूम है क्या करना है? और इसके लिए वहां पर जो वैन्यू सिस्टम्स है जापान में वो देखते हैं कि कंट्री की क्रेडिबिलिटी क्या है? कंट्री की लीडरशिप क्या कर रही है? अगर जापान इतना इन्वेस्टमेंट कर रहा है भारत में इट इज टेस्टीिमोनियल ऑफ द फैक्ट कि दे हैव द दे दे बिलीव इन द लीडरशिप विज़ ऑफ प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी जी नहीं तो जापान नहीं करने वाला आपको पैसे आपके पास क्यों करेगा जब सीडब्ल्यूजी में आप देख लीजिए जब कांग्रेस की सरकार में टॉयलेट पेपर 4000 में लिया था वो सुरेश करमांडी जो था उस समय इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन का वो हेड था मुझे याद है बाकी सब चीज मैं अगर लोगों को बताना चाहूं तो वो चेक कर सकते हैं Google में चेक कर सकते हैं मुझे पूछने की जरूरत नहीं है क्योंकि क्योंकि बहुत सारे जो कमेंट्स आते हैं यहां पे लोगों के जो कांग्रेस समर्थित वो सिर्फ हमें बोलते रहते हैं कि हम बीजेपी के मुख पत्र हैं। ऐसा नहीं है। आप जाके चेक कर लीजिए। टॉयलेट पेपर आज भी कोई आज कोई भारत के अंदर भारत के अंदर मैं आपको ये भी बोल देता हूं। मैं आपको मैं एक चीज और बोलना चाहता हूं। इवन अंबानी और अडानी भी टॉयलेट पेपर 4000 4000 का नहीं लिया लेता होगा। ठीक है? वो भी आज के डेट में वो तो आज से 202 साल पुरानी बात है। एनीवे उमेश जी अगर इसके जियोपॉलिटिकल एंगल पे बात करें जापान जो है वो चाइना के जो रिस्क है उससे निकलना चाहता है। इंडिया उनका नेक्स्ट जो है स्ट्रेटेजिक बट है ये समझ में आ रहा है। तो क्या ये सिर्फ बैंकिंग स्टोरी है या इंडोपेसिफिक जियोपॉलिटिक्स का फाइनशियल चैप्टर? इट इज अ मैरिज इट इज अ लॉन्ग टर्म मैरिज बिटवीन टू इकोनमीज़। वन वि इज हैविंग द टेक्नोलॉजी वन इट इज हैविंग इन्वेस्टमेंट एंड अनदर कंट्री व्हिच इज हैविंग द होप व्हिच इज हैविंग द डिमांड व्हिच इज व्हिच इज एस्पायरिंग टू ग्रो और भारत रिप्लेस कर सकता है चाइना को चाइनीस को अगर रिप्लेस करना है तो आपको जैपनीज कैपिटल प्लस जैपनीज इन्वेस्टमेंट प्लस इंडिया का ड्रिवन डिमांड और एक स्ट्रांग लीडरशिप मिल जाता है वी कैन इजीली रिप्लेस चाइनीस थोड़ा सा हमें यहां पर सोचने समझने वाली बात है जापान वही चाहता है कि यहां पर जो प्रॉब्लम्स क्रिएट होते हैं जैसे हमारे अगर कोई इन्वेस्टमेंट आ जाता है यहां पर लोग फ्लसी मतलब केसेस डाल देते हैं। लोग वहां पर इससे क्या होता है प्रोजेक्ट का कॉस्ट बढ़ जाता है। जैसे आप देखिए मुंबई के अंदर जब वहां पर मेट्रो हो रहा था तो कुछ लोगों ने वहां पर कोर्ट केसेस डाल दिए थे। इससे क्या फायदा हुआ? आप सोचिए जब बीजेपी की सरकार नहीं थी महाराष्ट्र में वहां पे बुलेट ट्रेन के ऊपर काम नहीं हो रहा था। और अब देखिए जब देवेंद्र फडनवीस की सरकार आ चुकी है वहां पर काम चालू हो गया है बाय 2029 मोस्टली बुलेट ट्रेन विल बी ऑपरेशनल बिटवीन अहमदाबाद एंड बॉम्बे दिस इज द टाइप ऑफ ग्रोथ वी नीड और आप ये भी देखिए 2030 में हम अहमदाबाद इस होस्टिंग कॉमनव्थ गेम्स और 2036 में अहमदाबाद विल बी होस्टिंग द ओलंपिक्स एस वेल तो इन्वेस्टमेंट की तो ये स्टार्ट है अभी तो और इन्वेस्टमेंट आएगा मैं ये बता रहा हूं बिल्कुल तो ये कह सकते हैं ये तो अभी ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है जैपनी और कोई नहीं है और एक और एक चीज बता देता हूं गिफ्ट सिटी के अंदर जैपनीज इन्वेस्टमेंट्स आने वाले हैं वो भी वो अलग कभी बताऊंगा ये तो मैं अगर बोलता जाऊंगा तो और एक 20 मिनट हो जाएगा बोला ही था के सिटी को भी मैंने मेंशन किया था एनीवे तो मैं ये बोल रही थी कि जापानीज बक्स का इंडिया आना कोई कोइंसिडेंस तो नहीं है ये ग्लोबल कैपिटल का माइग्रेशन है स्लो इकॉनमी से फास्ट इकॉनमी की तरफ तो इंडिया के लिए ये अपॉर्चुनिटी है पर साथ ही टेस्ट भी है। टेस्ट ये कि क्या हम सिर्फ पैसा लेंगे या साथ में एक्सपर्टीज स्टेबिलिटी और लॉन्ग टर्म कमिटमेंट भी इंश्योर करेंगे। बैंकिंग सिर्फ बैलेंस शीट का खेल नहीं होता। यह इकोनॉमिक सोवनिटी का सवाल होता है। जापान आ रहा है। लेकिन देखना यह है कि इंडिया डील को लीड करता है या डील इंडिया को ड्राइव करती है। उमेश जी बहुत धन्यवाद आपका हमारे साथ इस चर्चा में जुड़ने के लिए। नमस्कार। जय हिंद जय भारत। जय सियाराम अंब जय सियाराम उमेश जी।

Japanese mega banks are rapidly expanding their footprint in India’s banking and financial sector, signalling a strategic shift away from Japan’s stagnating domestic market toward India’s high-growth economy.

In this video, we decode why Japan’s biggest financial institutions — Mizuho Financial Group, Mitsubishi UFJ Financial Group (MUFG), and Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) — are increasingly investing billions of dollars in India.

The spotlight is on Mizuho’s $523 million acquisition of a controlling stake in Avendus, but this is only one piece of a much larger puzzle. From SMBC’s landmark investment in Yes Bank to MUFG’s talks with Shriram Finance, Japanese banks are positioning themselves across India’s banking, NBFC, investment banking, and digital lending ecosystem.

We also examine:

Why Japan’s ageing population and low-growth economy are pushing capital overseas

How India’s expanding credit market and regulatory clarity are attracting foreign banks

RBI’s foreign ownership limits and how Japanese banks are structuring their investments

What India gains from Japanese capital, governance standards, and risk management

Why Indian banks have limited presence in Japan despite deep bilateral ties

With India projected to grow above 7 percent, and banking reforms strengthening balance sheets, Japanese institutions see India as the next global financial growth engine.

This is a deep-dive analysis into India–Japan financial ties, global capital flows, and the future of India’s banking sector.

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44 Comments

  1. Indian banks collect 7% to 24% interest from the customers. Will the japanese be allowed to lend money at lower interest rates? Atleast in personal loan category?

  2. Umesh Jee, i wish you had kept quiet about Japan giving India loan at 0.15 %. Now that Munir and Shebaaz Sharif would be wised up by this channel news, they will find hard to sleep for many many Moons. Please do not be so harsh on the Beggars from across the fence, after all they are India's neighbours, have mercy on them.

  3. Amber mam,
    U are covering an Important
    Issue.
    Japan has had been growing
    Economy, then there are constraints exert negative
    effects.
    Aging age, smaller working
    population, developed infra,
    slow growth of new techs, that Japan may give big push
    to Japanese economy, lesser
    opportunity to invest in growing economy. And Japan
    did face slump in Housing
    Market.
    Japan selected India for more
    investments to expand itself.
    Amber ur followers love
    U for ur mental horizon.

  4. Growth, economy, civilization, progress, everything was there but no sense of unity and self defense. ۔. ۔. ۔. ۔Muslims and Christians invaded, raped, murdered, looted. ۔. ۔. ۔and everything was over . ۔. ۔. ۔we are heading towards the same direction happily, to get repeated what we suffered in the past. 😊😊😊😊

  5. ईसी वजह से कांग्रेसी पप्पू ईतना बेचैन हो रहा है क्यूं की ६०साल तक देश को पुरा लुट लिया है वो सब अब नहीं हो पा रहा है ईसी वजह से कुछ भी झूठ भौक रहा है

  6. Japan is a good friend of India. We must cooperate with Japanese industries and Government in Defence, banking and finance, technology, open our sectors for investments.

  7. maybe chinese leaders are good at actions and indian leaders are good at
    words😏😏😂According to Indian state media reports.The cow dung medicine recently developed in India is said to be effective only when used by
    Indians😏😆😂🤣Indians are very good at wasting time chatting. They don't like taking action to do anything. Everyone wants to see other Indians get things done😏 They believe that chatting can solve everything😏😏

  8. Japan has a GDP of $ 4.3 trillion, and India is at $ 4.1 or $ 4.2 trillion. India has returned to the 5th position. Japan is in 4th Position. These guys are not talking about how it is like that with 0% growth for 25 years. They should explain that concept, how it is holding this position due to what factors, why India went up and came back, if everything is better in India for past 35 years from globalization.

  9. Kya congress congress kar rahe ho 1947 se 2014 tak desh me kya kya huwa us par 1 video karo
    Aap log lagatar congress bol rahe ho tabhi se mene thoda study kiya ki un logo ne desh me kya kiya

  10. My exit plan is simple: When the Kvadden pump goes parabolic post-launch, I'm swapping all those digital coins for real-world physical gold

  11. Kvadden feels like the one project everyone will wish they sold their dividend stocks for early, 100x vibes all over this

  12. Rahul and Sonia Gandi say they want do only curruption no development. They do not understand what is development of Bharat. It is cheat family. Dont vote Congress.