Indian Economy के चमकने से हमें-आपको कितना फ़ायदा? Japan को कैसे पछाड़ा? Kharcha Pani

वी आर द फोर्थ लार्जेस्ट इकॉनमी एस आई स्पीक। वी आर अ फोर ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी एस आई स्पीक एंड दिस नॉट माय डाटा। दिस इज आईएमएफ डाटा। इंडिया टुडे इज लार्जर देन जापान। हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। हम 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हैं। भारत आज जापान से बड़ी अर्थव्यवस्था है। अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से आगे हैं। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने बीते दिनों यह बात कही। भारत की इकॉनमी के लिए यह बड़ी खबर है। लेकिन हम आज इन नंबर से आगे बढ़कर यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ किन पैराटर्स पर तय होती है। इसका हमारे आपके जीवन पर क्या फर्क पड़ता है और नीति आयोग के सीईओ जो बात कह रहे हैं उसकी स्पष्टता और उसके बरक्स खड़े कुछ बिंदुओं का भी एनालिसिस करेंगे। नमस्ते आप देखना शुरू कर चुके हैं ललन टॉप का डेली फाइनेंसियल बुलेटिन खर्चा पानी। बायटा एंड शारदा [संगीत] यूनिवर्सिटी। भारत की इकॉनमी को लेकर यह बड़ा दावा बीवीआर सुब्रमण्यम ने नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की 10वीं मीटिंग के बाद किया। यह भी कहा कि अगर इसी रफ्तार से चलते रहे तो 3 साल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी होगी। उन्होंने आईएमएफ की अप्रैल 2025 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की जीडीपी 4.187 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 356 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह जापान की अनुमानित जीडीपी 4.186 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ज्यादा है। वेयर द सॉफ्टवेयर इंजीनियर मीट्स द टैलेंटेड फोटोग्राफर। द वर्ल्ड कम्स टुगेदर एट शारदा यूनिवर्सिटी जीडीपी इसका आपने कई बार जिक्र सुना होगा। शरीर का टेंपरेचर नापने के लिए जैसे थर्मामीटर होता है वैसे ही जीडीपी देश की इकॉनमी को नापने के काम आती है। लेकिन जैसे शरीर के सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ टेंपरेचर सही होना काफी नहीं है। उसी तरह किसी देश की तरक्की के लिए महज जीडीपी का बढ़ना काफी नहीं। तो क्या-क्या पैराटर्स हैं देश की तरक्की के? देशों की आर्थिक तरक्की के लिए उनके विकास को परिभाषित करने के लिए कोई एक परिभाषा नहीं है। इसके लिए कुछ पैराटर्स तय हैं। पहला पैरामीटर जीडीपी। यह देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विज की वैल्यू को दिखाती है। मतलब एक साल में देश के अंदर जितने भी सामान बने हैं, सेवाएं दी गई हैं, उसके कुल मूल्य को जीडीपी कहा जाता है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं, उन्हें भी शामिल किया जाता है। जीडीपी दो तरह की होती है। रियल जीडीपी और नॉमिनल जीडीपी। रियल जीडीपी में गुड्स और सर्विज की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर या बेस प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल जीडीपी को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2022 से 2023 है। पहले यह 2011 से 2012 था। अभी 6 महीने पहले ही सरकार ने इसे बदला है। वहीं नॉमिनल जीडीपी का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है। जीडीपी की घट बढ़ चार फैक्टर से प्रभावित होती है। पहला हम आप हम जितना खर्च करते हैं वो इकॉनमी में योगदान देता है। दूसरा प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ। यह जीडीपी में 32% योगदान देती है। तीसरा सरकारी खर्च यानी गुड्स और सर्विज प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है? इसका जीडीपी में 11% योगदान है। और चौथा नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इंपोर्ट से घटाया जाता है। क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इंपोर्ट ज्यादा है। यानी हम ज्यादा सामान बाहर से खरीदते हैं। इसलिए इसका इंपैक्ट जीडीपी पर भी नेगेटिव ही पड़ता है। अर्थव्यवस्था नापने का दूसरा पैरामीटर पर कैपिटा इनकम। पूरे देश में हर व्यक्ति की आय कितनी है? यह जानने के लिए जितनी पूरे देश की जीडीपी है उसे पूरी जनसंख्या को डिवाइड कर दीजिए। इस तरह से कुल कमाई में प्रति व्यक्ति का हिस्सा कितना है यह नंबर निकल आता है। प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है तो उस देश के लोग आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में माने जाते हैं। एक बात यहां गौर करने वाली है कि प्रति व्यक्ति आय निकालते वक्त हर आदमी औरत बच्चे बूढ़े यहां तक कि नवजात बच्चों को भी गिना जाता है। माने कमाने वालों और ना कमाने वालों सबको। अब सवाल यह है कि देश की पर कैपिटा इनकम कितनी हो तो देश को विकसित कहा जाएगा? अर्थशास्त्रियों में इस बात को लेकर अलग-अलग राय है। बिजनेस स्टैंडर्ड के एक रिपोर्ट के मुताबिक 12,000 से $5,000 के बीच की सालाना पर कैपिटा इनकम होना एक विकसित देश बनने के लिए जरूरी है। वहीं कुछ अर्थशास्त्री $25,000 से $00 के बीच का फिगर देते हैं। भारत सरकार कह रही है कि देश चौथी बड़ी इकॉनमी बन गया है। लेकिन अगर पर कैपिटा इनकम के मामले में देखें तो भारत 197 देशों में 141वें नंबर पर है। इस मसले पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर सी रंगराजजन कहते हैं 2047 में जब भारत की आजादी के 100 साल होंगे तब हमें विकसित देश बनने के लिए हमारी पर कैपिटा इनकम $3000 के करीब होनी चाहिए। फिलहाल यह $2000 के करीब है। तीसरा पैरामीटर इंडस्ट्रियलाइजेशन का स्तर। किसी भी देश की तरक्की के लिए बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियलाइजेशन की जरूरत होती है। देश में जितने उद्योग उतने रोजगार। साथ ही देश की कुल आय में भी इसका बड़ा योगदान होता है। और चौथा पैरामीटर रहन-सहन का स्तर माने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग। जिन देशों में पर कैपिटा इनकम के आधार पर कैटेगराइजेशन मुश्किल होता है, उनमें स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग को मानक माना जाता है। उदाहरण के तौर पर अधिकतर विकसित देशों में हर 1000 जन्मे बच्चों पर 10 से भी कम मौतें रिकॉर्ड की जाती हैं। साथ ही इन देशों में औसत आयु 75 साल रिकॉर्ड की गई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की वेबसाइट कहती है कि साल 2000 से 2019 तक पूरी दुनिया में औसत आयु 6 साल तक बढ़ी है। स्वास्थ्य सुविधाएं जितनी बेहतर होंगी शिशु मृत्यु दर उतनी ही घटेगी। साथ ही औसत आयु में भी इजाफा होगा। तो यह मानक आर्थिक आधार पर कोई देश कितना डेवलप है उसकी तस्दीक करते हैं। अब तक भारत चौथी बड़ी इकॉनमी बना है। तो इन पैराटर्स पर देश का प्रदर्शन कैसा रहा जानने के लिए रुख करते हैं एक्सपर्ट का। यह सच है कि कुछ पैमाने ऐसे होते हैं जो कि शायद इस तरफ इशारा नहीं करते हैं क्योंकि उसमें आपको पर कैपिटा इनकम देखें तो अभी भी हम बहुत नीचे के पायदान पे हैं। पर यह देखते हुए कि हमारी आबादी भारत की 140 45 करोड़ है और पर कैपिटा इनकम यानी कि प्रति व्यक्ति आय कैलकुलेट करने के लिए आपको टोटल आबादी से डिवाइड करना पड़ता है। टोटल जीडीपी से डिवाइड करना पड़ता है आबादी को। तो डिनोमिनेटर हैवी होने की वजह से पर कैपिटा आबादी आती है। पर यह देखते हुए सबसे बड़ा मेरे लिए पैमाना यह है कि 1947 से ले और 2014 तक हम मात्र 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचे थे और 2014 से ले 2025 तक हम उससे दुगने से ज्यादा यानी 4.18 से ऊपर हम पहुंच चुके हैं। तो ये इस बात को जतलाता है कि सरकार ने 2014 के बाद जितनी भी नीतियां लागू करी जमीनी तौर पे यह सच है कि कुछ नीतियों का कम परिणाम आया। कुछ का ज्यादा आया, कुछ का मॉडरेट आया। पर यह देखने को मिलता है क्योंकि आंकड़े खुद बोलते हैं इसमें कोई किसी के और सबसे अच्छा तरीका मैं तो यह मानता हूं कि अपनी व्यक्तिगत अर्थव्यवस्था लोग देख लें। 2014 में आप एज एन इंडिविजुअल आप कहां खड़े थे? क्या आपने 2014 के बाद तरक्की करी है? क्या आपकी आय बढ़ी है? क्या आपकी फैमिली का लिविंग स्टैंडर्ड बढ़ा है? क्या आपका ओवरऑल जो आपको फैसिलिटीज आप लेते हैं, वो बढ़ी है? इन सबको देख के आपको अनुमान लग जाएगा कि हमें वाकई में 4 ट्रिलियन डॉलर धरातल पर उतरती दिखी है या नहीं दिखी है। अब अगला सवाल आता है कि देश की इस इकोनॉमिक तरक्की का हमारे आपके जीवन पर कैसे और कितना असर पड़ेगा? प्रत्यक्ष असर पड़ेगा या फिर अप्रत्यक्ष? जब कोई देश इस तरह के सूचकांक में ऊपर चढ़ता है तो निवेश बढ़ता है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। खासकर तकनीक, विनिर्मा और सेवा क्षेत्र में। बढ़ती जीडीपी और निवेश से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार की संभावना प्रबल होती है। साथ ही आय बढ़ने पर वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। इसके साथ-साथ चुनौतियां यह है कि आय का असमान डिस्ट्रीब्यूशन और महंगाई जैसी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। जिन्हें सरकार को संबोधित करना होगा। यह सच है कि भारत में अभी भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनकी आय बहुत कम है और देश की वेल्थ कंसंट्रेटेड है। कुछ परसेंटेज लोगों के पास देश की ज्यादातर वेल्थ है। पर भारत जैसे बड़े देश में जो इतने टाइम तक पिछड़ा रहा मैं समझता हूं हमें आर्थिक असमानता को दूर करना सबसे कठिन चैलेंज है। और जहां तक महंगाई की बात है, महंगाई को हमने काफी हद तक नियंत्रण में रखा है। अगर जिओपॉलिटिकल फैक्टर्स यहां से बिगड़ते नहीं है। मैं जोर देकर कह रहा हूं जैसे रशिया यूक्रेन की लड़ाई चल रही है। वेस्ट एशिया में कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है। भारतपाकि टेंशन मैं समझता हूं ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। सीज फायर है। तो मुझे पूरी उम्मीद है हम 6.5 7% या इससे भी ज्यादा रफ्तार से बढ़ते रहेंगे। तो अपने आप ये आर्थिक असमानता कम हो जाएगी। आर्थिक असमानता को कम करने का सबसे कारगर तरीका सरकार के पास रहेगा कि एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दें जिससे रोजगार के अवसर ज्यादा निकलेंगे। सरकार दूसरा कदम होता है बुनियादी ढांचे पर खर्च करना। बुनियादी ढांचे पे सरकार ने खर्च करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। पर अगर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट पे और भी ज्यादा काम हो इससे भी ज्यादा काम हो तो मुझे लग रहा है वो आर्थिक असमानता को जल्दी दूर करने में कामयाब होंगे। एक और कारण आर्थिक असमानता का है कि हमारा कृषि आधारित देश है। 60 से 70% हमारी आबादी कृषि पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहती है। जबकि इसका योगदान जीडीपी में मात्र 15 16% के आसपास का है। तो इस कारण से ये आर्थिक असमानता आ जाती है। तो मुझे लग रहा है अगर हम कृषि क्षेत्र को और ज्यादा मुनाफे में ले आए और हम स्किल और एजुकेशन पे फोकस करें तो इन चैलेंजेस को हम जल्द ही ओवरकम कर सकते हैं। इसके अलावा इसी महीने यानी मई 2025 में ही आईएमएफ ने यह भी अनुमान जताया था कि 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी जो उस समय तक जर्मनी से 20% और जापान से 33% बड़ी होगी। इससे पहले 2020 में भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़ पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल किया था। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगले 4 साल में भारत की आर्थिक वृद्धि 10.1% तक जा सकती है। देश बढ़े खूब तरक्की करें। नागरिकों का जीवन सुधरे ऐसी कामना है। आज का खर्चा पानी यहीं तक अपना और अपनों का ख्याल रखिए। ललन टॉप देखते रहिए। शुक्रिया। शुभ रात्रि। [संगीत]

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#KharchaPani Show | Episode no. 1096 | 26 May 2025

In today’s show, we are discussing following news:

As India is the fourth largest economy in the world, at what parameters is it decided that a country is becoming the third largest, fourth largest, or largest economy? How has India’s economy outperformed Japan’s? How are GDP and per capita income calculated? What is the road and challenges ahead for the Indian economy?

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40 Comments

  1. किसी भी देश को विकसित होने के लिए देश के हर हिस्से में उद्योग लगाना चाहिए।

  2. अभी ललनटोप भी alAaj Tak जयसे thamnel use kar raha he , lagata hai lalntop apni pahchan kho Raha he.😢😢😢

  3. जापान भारत का मित्र राष्ट्र है जो भारत को आर्थिक, तकनीकी और सैन्य सहायता कर रहा है। इसलिए भारत ने जापान को धोया शीर्षक मुझे बहुत आपत्तिजनक लगा! 🤔😒🙏

  4. Bakwaas title… Although we just crossed totle gdp… If we see per person income and human idex we are way behind…i dont see any reason to celebrate

  5. 2007 india = 1 trillion
    2014 india = 2 trillion (avg growth rate 9.5% )
    2025 india = 4 trillion ( avg growth rate 6.3%)
    How is your finance expert manipulating people …

  6. भारत अपने गंदे शहरों को ही धो ले वहीं बहुत है। जापान को क्या धोएगा। भारत की औकात के अनुसार ही हेडलाइंस होनी चाहिए

  7. Over 100 million Indians living under PDS ration to survive & then lineup every single morning on railway tracks to relieve themselves in the absence of running water & lack basic sanitation facilities at home & women like you’re are often raped & killed while going out to attend nature’s call. Shameless people!

  8. धोया??? शर्म करो शर्म करो शर्म करो,,,कुछ तो मीडिया होने दायित्व निभा लेते,,,,,
    अरे ये तुम्हारे मेरे लिए इस देश के वासियों के चिंता और गहरी पीड़ा का विषय है परिस्थितियां आम जनता के हाथ से निकलती जा रही है गरीब और गरीब अमीर और अमीर बनता जा रहा है
    रोजगार ढूंढने से नहीं मिल रहा
    ऊपर वाला न करे अभी कोई करोना जैसी कोई विपदा आन पड़े
    त्राहिमाम मच जाएगा ,
    इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था में क्या आम जनता की इतनी दयनीय दशा होती है
    जिन जिन देशों को हमने पछाड़ा क्या उनकी जनता हालत हमारी तरह है।
    आखिर देश के संसाधनों का दोहन देश की जनता पे नहीं हो रहा तो कहां जा रहा है????
    जहां प्राकृतिक संसाधन है वो लोग तेल से इतना नहीं कमाते जितना हम अपने लोगो पर टैक्स लगा के तेल से कमाते है फिर सस्ता तेल जुगाड कर वो भी बेचते है
    ऐसा क्या है के है लोग के ये दशा है
    ये सवाल कौन पूछेगा ???

  9. Lallantop ko kya ho gaya hai sourav bhai aakhir kor ye headless likhta hai koi, ya koi godi media se editor rakh lia hai, kitni ghatiya headlines likh rahe ho pichle 3 hafto se, shame on you, views k lie? Aapke jo purane or regular darshak hai aapse yeh ummid nahi karte, apni garima nast na kre😡😡😡😡

  10. Although India’s per capita income is around $2,880, but income inequality is very high in india. According to India Today (January 2025), the top 1% of the population earns about 75 times more than the bottom 50%.
    😢